धम्मपथ

गुरुवार, ३१ मार्च, २०१६

संत कबीर अमृतवाणी

☸ संत कबीर अमृतवाणी☸

पर नारी पैनी छुरी,
विरला बांचै कोय
कबहुं छेड़ि न देखिये,
हंसि हंसि खावे रोय।

अर्थ

महान संत कबीर जी कहते हैं कि दूसरे की स्त्री को अपने लिये पैनी छुरी ही समझो। उससे तो कोई विरला ही बच पाता है। कभी पराई स्त्री से छेड़छाड़ मत करो। वह हंसते हंसते खाते हुए रोने लगती है।

विचार प्रसारक
मनोज काळे,बदलापुर
☸☸☸☸☸☸☸

कोणत्याही टिप्पण्‍या नाहीत:

टिप्पणी पोस्ट करा